नई दिल्ली, जनवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ सिर्फ इसलिए कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि उसके आदेश में कोई गलती है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के एक जिला न्यायाधीश की बर्खास्तगी रद्द कर दी। इस जिला न्यायाधीश ने आबकारी अधिनियम के तहत आरोपियों को जमानत देने में अलग-अलग मापदंड अपनाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक निडर न्यायाधीश एक स्वतंत्र न्यायपालिका की आधारशिला है। ठीक उसी तरह जैसे एक स्वतंत्र न्यायपालिका स्वयं वह नींव है जिस पर कानून का शासन टिका हुआ है। काम का होता है भारी दबावजस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि एक न्यायिक अधिकारी को मामलों का फैसला करने का कठिन कर्तव्य सौंपा जाता है। अनिवार्य रूप से, मामले में एक पक्ष को हार का सामना करना पड़ता है तथा वह अस...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.