बलरामपुर, अप्रैल 1 -- जिले में एनसीईआरटी की किताबों की उपलब्धता और उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन स्तर पर भले ही सस्ती और मानक शिक्षा के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता देने की बात कही जाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। बुक सेलर की दुकानों पर निजी प्रकाशकों की किताबों की भरमार है, जबकि एनसीईआरटी की पुस्तकें सीमित या अनुपलब्ध रहती हैं। स्कूलों द्वारा भी अधिकतर निजी प्रकाशकों की किताबें ही निर्धारित की जाती हैं। जानकारों के अनुसार, इसके पीछे कमीशन का बड़ा खेल है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर अधिक मार्जिन मिलने के कारण इन्हें बढ़ावा दिया जाता है, जबकि एनसीईआरटी की किताबों पर लाभ बहुत कम होता है। इस स्थिति में अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं बचता और उन्हें महंगी किताबें खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।कोटशासन के...