निजी क्षति पर भी प्रभु ने पिता का सम्मान रखा
वाराणसी, अगस्त 3 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। प्रभु श्रीराम ने पिता दशरथ के वनगमन आदेश का प्रसन्न मन से पालन किया। हालांकि यह उनकी व्यक्तिगत क्षति थी किंतु उन्होंने उनका अपमान नहीं होने दिया। उनके सम्मान के लिए उन्होंने बड़ा ही सुंदर तर्क दिया। यह भी पढ़ें- Varanasi News: भयमुक्त समाज बनाना ही राजा का अंतिम लक्ष्यप्रभु श्रीराम का आदर्श दारानगर स्थित पातालपुरी मठ में रविवार को ये विचार पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालकदेवाचार्य ने व्यक्त किए। श्रीराम परिवार गाथा समारोह के चौथे दिन उन्होंने कहा कि श्रीराम ने माता कौशल्या को वनगमन के आदेश की बात बताई। उन्होंने उनसे कहा कि वह उन्हें जाने की आज्ञा दें। क्योंकि पिता ने राज्य को दो भागों में बांट दिया है। वन का बड़ा भाग उन्हें मिला है। अयोध्या का छोटा राज्य भरत को। उनका यह कथन पिता के सम्मान में वृद्धि क...
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