वाराणसी, फरवरी 4 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। सुबह-ए- बनारस आनंद कानन की घाट संध्या के तहत होने वाले काव्यार्चन प्रकल्प का 50वां आयोजन मंगलवार को अस्सी घाट पर हुआ। इस सत्र में नगर के वरिष्ठ एवं नवोदित रचनाकारों ने अपनी साहित्यिक जिजीविषा का परिचय दिया। डॉ. चकाचौंध ज्ञानपुरी की अध्यक्षता में काव्य पाठ की शुरुआत आस्तिक शुक्ला ने की। उन्होंने 'वर्षा बरस रही थी बहुत जोर से बरस रही थी' रचना से प्रकृति का सुंदर चित्रण किया। उदीयमान कवियित्री अनु मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण के माध्यम से कर्म करने का संदेश अपनी रचनाओं से दिया। इस युग में मानवता किस तरह से खत्म होती जा रही है उसकी बानगी उन्होंने अपनी दूसरी रचना से पेश की। 'मानती हो तो फिर मुस्कुराना क्यों छोड़ दिया, गुनगुनाती हो गीत गाना क्यों छोड़ दिया...' के माध्यम से उन्होंने प्रेम के विविध रंगो...
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