वाराणसी, सितम्बर 8 -- वाराणसी,मुख्य संवाददाता। एक चतुर्युग की कुल आयु 43 लाख 20 हजार वर्ष है। चारों युगों की अलग-अलग गणना नासदीय सूक्त में विस्तार से की गई है। ये बातें दंडी संन्यासी वनवैभवारण्य सरस्वती ने कहीं। वह सोमवार को अस्सी स्थित पूर्वाम्नाय श्रीदक्षिणामूर्ति मठ में चातुर्मास अनुष्ठान के अंतर्गत प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नासदीय सूक्त ऋग्वेद के 10वें मंडल का 129वां सूक्त है। इसमें ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा सृष्टि के निर्माण से पहले की स्थिति का वर्णन है। दंडी संन्यासी ने कहा कि नासदीय सूक्त जिज्ञासा और संदेह को महत्व देता है। यही कारण है कि आधुनिक वैज्ञानिक और भौतिक विज्ञानी भी इसके विचारों को बिगबैंग थ्योरी और क्वांटम मैकेनिक्स के शुरुआती विचारों के बेहद करीब पाते हैं।इससे पहले दैनिक मंगला आरती से अनुष्ठान आरंभ हुए। नित्य प...