बिहारशरीफ, मार्च 12 -- नालंदा केवल स्मारक नहीं बल्कि जीवित ज्ञान परंपरा का प्रतीक: डॉ आकाश पसरीचा नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के पहले सत्र में 21वीं सदी में नालंदा के महत्व पर हुआ मंथन बोले - प्राचीन काल की बहुविषयक शिक्षा पद्धति आज के विज्ञान व तकनीक आधारित युग में भी है प्रासंगिक नॉलेज इकोनॉमी के दौर में भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बौद्धिक शक्ति बना सकती है यह परंपरा फोटो : साहित्य महोत्सव 02 : राजगीर कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार को साहित्य महोत्सव में शामिल लोग। राजगीर, निज संवाददाता। नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के पहले सत्र में '21वीं सदी में नालंदा का महत्व' विषय पर विमर्श हुआ। इसमें जाने-माने लेखक डॉ. आकाश पसरीचा ने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक धरती पर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय को केवल एक पुरातात्विक धरोहर या स्मारक म...