मेरठ, अप्रैल 16 -- मेरठ, मुख्य संवाददाता भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण आया है, जिसका इंतजार देश की करोड़ों महिलाओं को कई दशकों से था। लंबे समय से लंबित 'नारी वंदन अधिनियम' के पारित होने के साथ ही महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में एक नया और सशक्त अधिकार प्राप्त हुआ है। यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि समानता, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है।यह मानना है समाजसेविका और एडवोकेट शाहीन परवेज का। उनका मानना है कि महिला आरक्षण की मांग कोई नई नहीं है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी, जब पहली बार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव सामने आया। यह भी पढ़ें- नारी शक्ति को संवैधानिक सम्मान: दशकों की प्रतीक्षा के बाद 'नारी वंदन अधिनियम' से खुला सशक्तिकरण का नया अध्याय उस ...
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