मुजफ्फर नगर, दिसम्बर 28 -- नारी जो कभी किसी से नहीं हारी जिसका तीनो लोक है आभारी वह है आज की देश की नारी। जिस परिवार में जाती है महका देती है उसे परिवार में प्रेम सिखा देती है । जगत की जननी जिनवाणी, लक्ष्मी, सरस्वती, मां भारती का रूप है। क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने महिला सम्मेलन को चंद्र प्रभ दिगंबर जैन मंदिर पीसनोपाडा में अबला शब्द का मतलब समझते हुए कहा जो हर लेती है सारी भला वह है अबला। देश की महिला जब अपने समर्थ और शक्ति पर आ जाती है तो यमराज से भी प्राण खींच लाती है। पुरुष मकान बन सकता है मगर उसे घर बनाने का देश की महिला करती है। नारी को शिक्षा का शंखनाद ब्राह्मणी सुंदरी को शिक्षा देकर तीर्थंकर आदिनाथ ने किया था। जो आज सारी दुनिया में ब्राह्मणी लिपि के नाम से जानी जाती है। मुनिश्री ने नारी जाति से कहा कि वह बेटी बनकर...
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