नई दिल्ली, जून 7 -- अक्सर हम देखते हैं कि बड़े-बड़े घरानों में बच्चों को विरासत में सजी-सजाई गद्दी आसानी से मिल जाती है। भारत के कॉर्पोरेट जगत में नेपोटिज्म या भाई-भतीजावाद कोई नई बात नहीं है। परिवार का बड़ा नाम ही कई बंद दरवाजे खोलने के लिए काफी होता है। लेकिन क्या हो जब एक पिता जो खुद 31000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू वाली कंपनी का मालिक हो, अपनी ही बेटी के लिए यह नियम बदल दे? जब बात काबिलियत और विरासत के बीच टकराव की आती है तो एस्कॉर्ट्स कुबोटा के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल नंदा का नजरिया बिल्कुल अलग है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी बेटी, नव्या नवेली नंदा और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की नातिन को सिर्फ अपने नाम के दम पर कंपनी में कोई बड़ी कुर्सी नहीं मिलने वाली। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो निखिल नंदा का मानन...