फतेहपुर, अप्रैल 10 -- फतेहपुर। मंहगी फीस, मनमानी रेट में कापी, किताबें और ड्रेस, इसके बाद अब बच्चों को स्कूल भेजने में जान का जोखिम। अभिभावक परेशान हैं, विरोध के सुर तेज हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं, अच्छी शिक्षा के दावों के बीच प्राइवेट स्कूलों में भेजना मजबूरी जैसा बन गया है। जिसका फायदा निजी स्कूल वाले उठा रहे हैं। छोटे स्कूल ही नहीं, बल्कि नामी-गिरामी स्कूल भी नियमों को ताक पर रखकर खटारा वैन में बच्चों को ढो रहे हैं। मोटी फीस वसूलने के बाद भी बच्चों के परिवहन में सुरक्षा के नाम पर इंतजाम शून्य और जिम्मेदार विभाग केवल खानापूर्ति में जुटा है। सवाल यही है कि क्या नाम बड़े दर्शन छोटे वाली कहावत चरिर्ताथ हो रही है। पुरानी कबाड़ वैन से बच्चों का सफरशहर के कई स्कूलों में चल रही वैनें दिल्ली और नोएडा से खरीदी गई जो 10 से 15 साल पुरानी बताई ...