कानपुर, अक्टूबर 1 -- कानपुर। सुंदरता नेत्र का विषय है। सुंदर वस्तु या व्यक्ति को देखकर आकर्षण स्वाभाविक है। नाम और रूप को मिथ्या बताने वाले कभी-कभी सुंदरता से ठगे जाते हैं। यह बातें दीदी मां मंदाकिनी श्री रामकिंकर ने कहीं। श्री रामलीला सोसाइटी परेड के श्रीराम कथा कार्यक्रम को तीसरे दिन प्रवचन कर रहीं थी। कथा मर्चेंट चेंबर हॉल में चल रही है। कहा कि रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने प्रभु श्रीराम और माता सीता के दिव्य अनुराग और शृंगार को विदेह वाटिका में जनकपुर में प्रस्तुत किया है। भगवान श्रीराम भी सीता जी के दर्शन से अभिभूत थे। रावण सौंदर्य प्रेमी होने के नाते सीता जी को पाना चाहता था। एक जनक की वाटिका है, जहां सीता जी भगवान राम को देखकर भावविभोर हो जाती हैं। दूसरी ओर रावण की अशोक वाटिका में वह दुखी और विरहीनी रूप में थीं। हनुमान जी ज...