नई दिल्ली, अक्टूबर 9 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक व्यक्ति को 2015 में मानसिक रूप से अक्षम नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में पेश सबूत उसकी सजा को बरकरार रखने के लिए जरूरी मानक से बहुत कम हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मेघालय हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि दोषसिद्धि के खिलाफ यह अपील बहुत परेशान करने वाले आरोपों से जुड़ी है, जिसमें आरोप है कि एक विशेष रूप से अक्षम नाबालिग बच्ची का उसके चाचा (यानी इस मामले में अपीलकर्ता) ने यौन उत्पीड़न किया था। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले में अभियोजन पक्ष को सबूत पेश करके आरोप साबित करने होते हैं। ये सबूत शक से परे होने चाहिए और आरोपी के अपराध को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने ...