विधि संवाददाता, जनवरी 7 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति के आजीविका के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता है। उसे भी रोजी रोटी कमाने का अधिकार है। कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी (लेखपाल) की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाते हुए यह टिप्पणी की जिस पर अपनी 16 साल की बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस मामले में शामिल होने की वजह से उसकी ज़िंदगी जीने के लिए रोजी-रोटी कमाने के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा-I की पीठ ने यह भी कहा कि यह अपील 2024 की है और केसों के भारी बैकलॉग के कारण निकट भविष्य में इसकी सुनवाई की बहुत कम संभावना है। ट्रायल कोर्ट ने पिछले साल मई में आरोपी पिता को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) और आईपीसी की धारा 3...
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