उत्कर्ष आनंद, अप्रैल 21 -- यूपी सरकार उस पीड़ित को 5 लाख रुपये का मुआवजा देगी जिसे अपराध के समय नाबालिग होने के बावजूद अन्य कैदियों के साथ एक सामान्य जेल में रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग को वयस्क कैदियों के साथ गैरकानूनी कैद में रखे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कस्टडी की गलतियों पर फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी कैद बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है। सर्वोच्च अदालत ने पूरे राज्य में ऐसी गलतियों को दोबारा होने से रोकने के लिए एक एसओपी को मंजूरी दी। सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया कि इसे बाकी सभी राज्यों को भी भेजा जाए ताकि इसका पालन सुनिश्चित हो सके। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने शनिवार को जारी एक आदेश में कहा कि किसी नाबालिग को वयस्क कैदियों के साथ रखना गैरक...