नई दिल्ली, फरवरी 6 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसले में एक नाबालिग लड़की के 30 सप्ताह के गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी अदालत किसी महिला को, और विशेष रूप से एक नाबालिग लड़की को, उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने जोर देकर कहा कि गर्भवती लड़की को बच्चे को जन्म देने या नहीं देने के उसके अधिकार को उचित महत्व दिया जाना चाहिए, खासकर तब जब उसका मन नहीं हो कि वह बच्चे को जन्म दे और ऐसी इच्छा उसने साफ साफ शब्दों में बार-बार जाहिर भी की हो। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि वे सभी जरूरी चिकत्सिा संबंधी उपायों का पालन करते हुए गर्भावस्था के चिकित्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.