नई दिल्ली, अगस्त 2 -- मद्रास हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के एक मामले की सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर स्पष्ट किया है। अदालत ने माना है कि सीटी बजाने के बाद नाबालिग लड़की का हाथ जबरन खींचना एक अस्वीकार्य और गलत व्यवहार है, लेकिन यह मामला पॉक्सो कानून के तहत 'यौन उत्पीड़न' के दायरे में आता है, न कि 'यौन हमले' के। यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट ने चेन्नई की एक विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए 'मंथाई उर्फ मनोगरन' नाम के व्यक्ति की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए की।क्या था पूरा मामला? घटना मार्च 2020 की है, जब आरोपी और पीड़ित नाबालिग लड़की एक ही आवासीय परिसर में रहते थे। 1 मार्च 2020 को जब लड़की अपनी चाची के घर खाना लेने जा रही थी, तब आरोपी ने बालकनी से सीटी बजाकर उसे बुलाया। लड़की द्वारा अनदेखा करने पर आरोपी नीचे आया, उसका हाथ खीं...