नई दिल्ली, मार्च 3 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। तीस हजारी अदालत ने करीब 14 वर्ष पुराने बाल श्रम और बंधक के मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मासूमों के बचपन से खिलवाड़ करने वाले कानून की नजरों से बच नहीं सकते हैं। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मानसी मलिक की अदालत ने तीन नाबालिग बच्चों को बंधक बनाने और उनसे बाल श्रम कराने के जुर्म में आरोपी अजय और बीना शर्मा को दोषी करार दिया है। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने अजय को अपहरण की धाराओं से बरी कर दिया। वहीं, सबूतों के अभाव में एक अन्य आरोपी राजीव को बरी करने का आदेश दिया है। यह मामला नवंबर 2012 का है। उत्तर प्रदेश के बलिया से तीन नाबालिग बच्चे दिल्ली आए थे। शिकायत के अनुसार, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर तीनों बच्चों की मुलाकात आरोपी अजय से हुई। उसने उन्हें काम दिल...
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