दरभंगा, मई 11 -- राजीव रंजन झा,दरभंगा। लनामिवि के स्नातकोत्तर संगीत एवं नाट्य विभाग में नाट्यकला के पाठ्यक्रम, उच्चारण और स्वर के उतार- चढ़ाव के महत्व की मूलभूत बारीकियों से परिचित करवाने के लिए सोमवार को सोदाहरण व्याख्यान का आयोजन किया गया। विषय विशेषज्ञ के रूप में विभाग के पूर्ववर्ती छात्र व शिक्षक रंगकर्मी हेमेंद्र कुमार लाभ ने पारसी रंगमंच, संस्कृत रंगमंच और जन नाट्य आंदोलन (इप्टा के संदर्भ में) से परिचय करवाया। अपने अनुभवों के आधार पर छात्रों को नाट्य में भारतेंदु युग, प्रसाद युग और आधुनिक युग के नाट्य और उसके विकास पर चर्चा की। वॉयस मॉड्यूलेशन और उच्चारण के महत्व को रेखांकित करते हुए पात्र के अनुकूल क्षेत्र विशेष की बोली के महत्व को भी समझाया। यह भी पढ़ें- त्रिवेणी कला संगम में वीकेंड एक्टिंग बैच 23 मई से नाट्यकला के विकास में हिन्दी...