नई दिल्ली, जुलाई 3 -- बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक स्थानीय नेता के खिलाफ जारी एक साल के जिला बदर का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि नागरिकों को सरकार का गुलाम नहीं बनाया जा सकता और सिर्फ इसलिए जिला बदर का आदेश नहीं दिया जा सकता कि कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ आंदोलन या विरोध प्रदर्शन में शामिल रहा है। जस्टिस माधव जामदार की एकल पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की कि महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही 'हॉर्स ट्रेडिंग' (दलबदल) को देखते हुए, याचिकाकर्ता अपने खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर बंद करवाने के लिए पार्टी बदलने पर विचार कर सकता है। याचिकाकर्ता सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी ने अपने खिलाफ जारी जिला बदर आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। यह आदेश भारत सरकार, भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, आंदोलन करने और नार...