नागपंचमी : विषधरों को नहीं मारने की निभा रहे परंपरा
बगहा, अगस्त 16 -- बगहा। नागपंचमी का पर्व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वनवर्ती क्षेत्रों में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा है। यहां के आदिवासी समुदाय वर्षों से नागपंचमी पर हिंसक जानवरों और विषधरों को नहीं मारने की परंपरा निभा रहे हैं। पर्व के माध्यम से ग्रामीण जंगल और उसमें रहने वाले जीव-जंतुओं की रक्षा का संकल्प लेते हैं। यह भी पढ़ें- Lucknow News: विधानसभा अध्यक्ष ने नागपंचमी की दी शुभकामनाएंनागपंचमी की तैयारी थारू आदिवासी मामलों के जानकार सह सेवानिवृत शिक्षक दृगनारायण प्रसाद ने बताया कि वनवर्ती क्षेत्रों में नागपंचमी की तैयारी करीब एक सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है। इस दौरान ग्रामीण पारंपरिक गीतों के साथ 'झारी' गाना शुरू करते हैं, जिसमें गीत व संगीत दोनों का मिश्रण होता है। नागपंचमी के दिन पूजा-अर्चना के साथ पर्व की पूर्णाहुति होती है।...
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