अलीगढ़, फरवरी 17 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। पद्मभूषण डा. गोपालदास दास नीरज और ज्ञानपीठ पुरुस्कार से सम्मानित शायर शहरयार ने अलीगढ़ को देश-दुनिया में पहचान दिलवाई। अफसोस नुमाइश प्रशासन की नजरों में इन हस्तियों की कद्र नहीं है। एक तरफ नुमाइश में होने वाली नाइटों पर तो करोड़ों रूपए का बजट खर्च किया गया लेकिन नीरज-शहरयार पुरुस्कार के लिए फूटी कौड़ी भी प्रस्तावित नहीं की गई। नुमाइश प्रशासन को पहले से चली आ रहीं तमाम परंपराएं तो ध्यान नहीं रहीं लेकिन वर्ष 2012 से शुरू हुई इस पुरुस्कार की परंपरा को जीवंत करने का ध्यान नहीं आया। राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। हिन्दुस्तान द्वारा की गई पड़ताल के अनुसार नुमाइश के खातों में 31 मार्च 2024 तक अवेशष राशि करीब 6.47 करोड़ थी। वर्ष 2024-25 में करीब 15.10 करोड़ की प्राप...
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