गोरखपुर, मई 1 -- गोरखपुर, निज संवाददाता गर्मी में दिन भर काम करने के बाद पेट की भूख शांत करने के लिए मजदूरों को तमाम जतन करना पड़ रहा है। पेट्रोलियम कंपनियों की तरफ से छोटू सिलेंडर मुहैया कराने का दावा हवाई साबित हो रहा है। मजदूर लकड़ी और कोयला पर खाना पकाने को विवश हैं। वहीं, तमाम मजदूर ब्लैक में सिलेंडर रिफिल करा रहे हैं। जहां उन्हें 200 से 300 रुपये किलो तक का भुगतान करना पड़ रहा है।

गैस किल्लत का सामना स्थिति यह है कि घरों से पीएनजी गैस पाइपलाइन से कनेक्शन कर गैस पहुंचा रहे श्रमिक खुद काम करने के बाद लकड़ी पर खाना बना रहे हैं। गैस किल्लत के पहले आसानी से रसोई गैस सिलेडर मिलने से ठेकेदार प्रवासी श्रमिकों को सिलेंडर उपलब्ध करवा देते थे, लेकिन जब से गैस किल्लत शुरू हुई है। श्रमिक लकड़ी पर भोजन बनाने को लेकर परेशान हैं। हालांकि, जिला प्र...