समस्तीपुर, अप्रैल 11 -- समस्तीपुर। कृषि प्रधान जिले में किसानों की स्थिति धीरे धीरे कर दयनीय होते जा रही है। कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी व्यवस्था की नाकामी से किसान हर साल धान की फसल में रूबरू होते है। रोपनी से लेकर कटनी तक कड़ी मेहनत के बावजूद किसानों केा अपनी लागत पूंजी भी नहीं निकल पाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों की मेहनत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वहीं लागत पूंजी भी धीरे धीरे करीब पांच साल में ही दोगुणा हो गया है। इस अनुपात में उनके मेहनत का वाजीब मूल्य तक नहीं मयस्सर हो पाता है। अगर मेहनत की फसल किसानों के दलानों तक आ जाती है तो सरकारी अव्यवस्था से बिचौलियों के हाथ में पहुंच जाती है। संग्रामपुर के किसान मदन गोपाल चौधरी बताते हैं कि पटोरी तथा इसके आसपास के क्षेत्र में धान की खेती कर पाना अब संभव नहीं है। किसानों को प्रतिकूल ...