धनबाद, मई 15 -- जेष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वट सावित्री का व्रत मनाया जाएगा। इस वर्ष शनिवार को अमावस्या व शनि जयंती पर यह पर्व मनाया जाएगा। इससे पूर्व शुक्रवार को नहाय खाय के साथ सुहागिनें इस व्रत का संकल्प लेंगी। वेदाचार्य पंडित रमेशचंद्र त्रिपाठी बताते हैं कि किसी भी व्रत, उपवास से एक दिन पूर्व नहाय खाय की परंपरा है। दरअसल यह व्रत से पूर्व खुद के शारीरिक और मानसिक शुद्धीकरण का हिस्सा है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि का प्रवेश 15 मई की देर रात 1 बजकर 31 मिनट पर होगा, जबकि 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से प्रतिपदा तिथि आरंभ हो जाएगी। उदया तिथि के आधार पर 16 मई को ही वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। इस दिन सुबह 10 बजकर 26 मिनट तक सौभाग्य योग रहेगा, इसके बाद शोभन योग प्रारंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से दोनों योग अत्यंत शुभ माने जाते हैं।...