गंगापार, मार्च 12 -- आम और महुआ के बाग उजड़ते चले जा रहे हैं। पूर्वजों द्वारा तैयार बाग और लगाए गए पेड़ धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं। मेजा के तरहार क्षेत्र पकरी सेवार, बारा दशरपुर, परानीपुर, भूईपारा, रैपुरा, कुंअरपट्टी, जेवनियां, शुक्लपुर, कनिगड़ा, समोगरा सहित विभिन्न गांवों में एक दशक पहले महुआ व आम की बाग हुआ करती थी। गर्मी के दिनों में चार महीने इसी बाग में गांव की आधी अबादी दिन के समय अपना समय बीतता था। आम के फल से बाग मालिकों को भारी आर्थिक मुनाफा होता था, अब ऐसा नहीं रह गया। आबादी बढ़ने के साथ आम व महुआ के बाग को औने-पौने दाम पर बेच कमाई का जरिया बना लिया गया। परानीपुर के डुहिया पकरी सेवार में रही दस बीघे की बाग सूनी हो गई, अब इस बाग की जगह खेती हो रही है। समोगरा गांव में एक दशक पुरानी महुआ की बाग उजड़ गई। पकरी सेवार गांव के प्रेम कृष्ण, प...