नवादा, मार्च 17 -- नवादा। राजेश मंझवेकर नवादा जिला, जिसने राजनीति को दिग्गज दिए, जिसने देश को नौकरशाह दिए, लेकिन जब बात कला, साहित्य और संस्कृति की आती है, तो आज का नवादा एक गहरी शून्यता की गिरफ्त में खड़ा नजर आता है। जिला मुख्यालय होने के बावजूद, नवादा शहर में एक अदद सक्रिय सुव्यवस्थित सामुदायिक कला केंद्र का न होना केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के रचनात्मक विकास पर लगा हुआ ताला है। नवादा की धरती कभी लोक कलाओं, नाटकों और काव्य गोष्ठियों से गुंजायमान रहती थी। यहां की मिट्टी में मगही संस्कृति की खुशबू रची-बसी है। लेकिन आज आलम यह है कि यदि किसी स्थानीय कलाकार को अपनी कला का प्रदर्शन करना हो, किसी कवि को अपनी रचनाएं सुनानी हों, या किसी नाट्य मंडली को नाटक का मंचन करना हो, तो उनके पास शहर में कोई सम्मानजनक मंच उपलब्ध नह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.