नई दिल्ली, अक्टूबर 18 -- शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व है। इन दोनों तिथियों के बीच एक ऐसा समय आता है, जिसे संधि काल कहा जाता है। इसी दौरान संधि पूजा की जाती है, जो दुर्गा पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों में शामिल है। इस पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की आराधना की जाती है। खास बात यह है कि संधि पूजा पूरे दिन में किसी भी समय नहीं की जाती, बल्कि इसका मुहूर्त अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल से तय होता है। आइए जानते हैं संधि पूजा के 48 मिनट इतने खास क्यों माने जाते हैं।अष्टमी और नवमी के बीच के 48 मिनट क्यों हैं खास? संधि पूजा का समय अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर बनता है। इन दोनों अवधियों का कुल समय 48 मिनट होता है। धार्मिक परंपरा में इसी अवधि को संधि काल कहा जाता है। इस दौरान मा...