वाराणसी, मार्च 18 -- वाराणसी। चैत्र नवरात्र की अमावस्या युक्त क्षयवति प्रतिपदा पर 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ घर-घर अनुष्ठान आरंभ हो जाएंगे। पहले दिन गायघाट स्थित मुखनिर्मालिका गौरी के दर्शन-पूजन का विधान काशीवासी पूर्ण करेंगे। बहुतेरे उपासक अलईपुर स्थित वरुणा किनारे प्रतिष्ठित देवी शैलपुत्री और दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर भी पहुंचेंगे। नौ दिनों तक आदिशक्ति के गौरी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाएगी। वासंतिक नवरात्र में भगवती की आराधना से समस्त सद्कामनाओं की पूर्ति होती है। भृगुसंहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्री के अनुसार वासंतिक नवरात्र में मां दुर्गा, लक्ष्मी एवं सरस्वती की आराधरा विशेष फलदायी मानी गई है। गौरी के नौ स्वरूपों की पूजा से सुख-समृद्धि, खुशहाली प्राप्त होती है। देवी के प्रीत्यर्थ नवरात्र के शुभ मुहूर्त में कलश की स्थापन...
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