वाराणसी, मई 21 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। नवधा भक्ति में तल्लीन रहने वाला मनुष्य निश्चित रूप से आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है। नवधा के नौ चरणों की वृहद व्याख्या प्रभु श्रीराम ने साधिका शबरी के समक्ष की थी।ये बातें आचार्य शुभम मिश्र ने कहीं। वह श्रीपुरुषोत्तम मास रामकथा आयोजन समिति की ओर से आयोजित श्रीराम सम्मेलन के चौथे दिन बुधवार की शाम प्रवचन कर रहे थे। नाटीइमली स्थित नित्य नया हनुमान मंदिर में उन्होंने कहा कि प्रभु की लीलाओं का श्रवण इसका प्रथम चरण है। उन लीलाओं का गुणगान दूसरा चरण है। स्मरण तीसरा, प्रभु चरण सेवा में रत होना चौथा चरण है। अपने ईष्ट की नित्य पूजा पांचवां, उनका वंदन करना छठा, स्वयं को उनका दास स्वीकार कर लेना सातवां चरण है। यह भी पढ़ें- श्रीहरि नाम ही कलियुग का सहारा, भंक्ति का संदेश प्रभु के प्रति स्वयं और स्वयं के...