वाराणसी, फरवरी 6 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। आभासी दुनिया में मेलजोल बढ़ाने के बाद काशी के नवगीतकार गुरुवार को यथार्थ के धरातल पर लौटे। नवगीत दिवस पर गुरुवार को अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय में गीतकारों का जुटान हुआ। उन्होंने नवगीत के सृजन से अब तक के उन्नयन में किए गए प्रयासों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। डॉ.रामसुधार सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद साहित्य में आए बदलावों ने गीत को नवगीत का रूप दिया। इसने लोक संवेदना और सामाजिक यथार्थ को प्रभावी स्वर प्रदान किया। डॉ.अशोक कुमार सिंह ने नवगीत को समय के साथ बदलती संवेदनाओं की अभिव्यक्ति बताया। ओम धीरज ने काशी को नवगीत आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमि बताया। प्रसन्न बदन चतुर्वेदी ने नवगीत की सरलता, लाक्षणिकता, समाजोन्मुखता और गेयता पर अपनी बात रखी। दो सत्रों में हुए आयोजन के प्रथम चर...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.