मुजफ्फरपुर, फरवरी 5 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। मुजफ्फरपुर अपनी साहित्यिक प्रतिभा के लिए राष्ट्रीय फलक पर पहले से ही चर्चित और सम्मानित है। इसी शहर के कविवर राजेंद्र प्रसाद सिंह ने 5 फरवरी 1958 में नए तेवर, कथ्य तथा शिल्प के गीतों को गीतांगिनी नाम से संग्रहित करते हुए इसके लिए नवगीत शब्द का प्रयोग किया। नई कविता के साथ ही नवगीत की भी शुरुआत हुई। ये बातें गुरुवार को आमगोला के शुभानंदी परिसर में नवगीत कुटुंब के तत्वावधान में आयोजित नवगीत दिवस में डॉ. ममता रानी ने कहीं। नवगीत इतिहास, विकास और विस्तार विषय पर डॉ. संजय पंकज ने कहा कि नवगीत किसी प्रवृत्ति विशेष के विरोध में नहीं शुरू हुआ, बल्कि यह गीतधारा का ही नव्यतम विकसित रूप है, जिसमें थके, हारे, टूटे, घबराए और डरे हुए लोग तथा लोक को संवेदनात्मक अभिव्यक्ति मिली है। परंपरा से समृद्ध होत...
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