चतरा, अगस्त 20 -- सिमरिया, प्रतिनिधि। उम्र के 90वां पड़ाव पर जिंदगी अक्सर आराम, सुकून और अपनों के साये की मांग करती है, लेकिन झारखंड के सिमरिया चौक पर हर दिन नजर आने वाले 90 वर्षीय द्वारिका पांडेय की कहानी कुछ अलग ही हकीकत बयां करती है। जीवन के इस संध्याकाल में तन्हाई, अपनों से दूरी और प्रशासनिक उदासीनता के बीच उनका यह रोजमर्रा का सफर मानवीय सहनशीलता और जीने की जिद की एक जीवंत मिसाल है।महज एक साल पहले जीवनसंगिनी का साथ हमेशा के लिए छूट गया। उनके अपने बेटे रोजी-रोटी और परिवार के सिलसिले में अलग-अलग शहरों में बसे हुए हैं। घर पर केवल उनका पोता ही उनका ख्याल रख रहा है, जो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है कि दादाजी को कोई तकलीफ न हो। यह भी पढ़ें- Ranchi News: राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस- अकेले घर में कटती उम्र, डिजिटल दुनिया में तलाशते सहारा इसक...