नदियों का सिमटता आंचल और बढ़ता सारण का संकट
छपरा, जुलाई 9 -- पेज चार की लीड नदियों का मौन संदेश पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा कभी नदियों की कल-कल ध्वनि से जागने वाला सारण आज उसी खामोशी से डरने लगा है फोटो 10 जुलाई में भी सुखी नजर आ रही मढ़ौरा की प्रमुख डबरा नदी न्यूमेरिक 100 किलोमीटर तक बहती है सारण में दाहा नदी 40 किलोमीटर से अधिक लंबाई है सारण तटबंध की छपरा, नगर प्रतिनिधि। सारण की धरती सदियों से नदियों की गोद में पली-बढ़ी है। गंडक, घाघरा और उनकी सहायक नदियां केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन, जैव विविधता और जनस्वास्थ्य की जीवनरेखा रही हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में इन नदियों का स्वरूप तेजी से बदला है। कभी अविरल बहाव और कलकल धारा के लिए पहचानी जाने वाली नदियां आज कई स्थानों पर सिकुड़ चुकी हैं। कहीं धारा टूट गई है, तो कहीं रेत के टीले उभर आए हैं। इसका असर अब केवल पर्यावरण तक ...
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