कटिहार, जनवरी 11 -- कटिहार। निज प्रतिनिधि नदियों व प्राकृतिक जलस्रोत के सूखने से पर्यावरण, कृषि क्षेत्र एवं स्थानीय अर्थ व्यवस्था पर भी प्रतिकुल असर हो रहा है। जिले में ही करीब आधा दर्जन छोटी नदियां अब बस कहने भर को रह गई है। यही स्थिति ग्रामीण इलाकों में पोखर, तालाब व अन्य जनस्रोत की भी है। नदियों के सूखने व भूमिगत जलस्तर नीचे जाने से आने वाले समय में किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी मिलना मुश्किल होगा। इससे खेती की लागत में वृद्धि के साथ ही उत्पादन भी कम होगा। नदियां का मिट रहा अस्तित्व सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी है। इसको लेकर अब समाज व आमलोग भी जागरूक हो रहे हैं। हलांकि जागरूकता को लेकर क्या करना और नदियों का संरक्षण कैसे करें इसका अभाव ही दिखाई देता है। नदियों के संरक्षण व इसके प्रदूषण मुक्त प्रवाह ...
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