उरई, मार्च 3 -- जालौन। नगर व ग्रामीण क्षेत्र में होलिका दहन का कार्यक्रम पारंपरिक ढंग से व उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सोमवार की रात को नगर व ग्रामीण क्षेत्र के 104 सार्वजनिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ है। इसके बाद लोगों ने घरों में होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया। हिरण्यकश्यप के कहने पर होलिका भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी गोद में बैठाकर आग में प्रवेश कर किया। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन होने लगा। होली का त्योहार मनाने का एक वैज्ञानिक कारण है। हालांकि यह होलिका दहन की परंपरा से जुड़ा है। शरद ऋतु की समाप्ति और बसंत ऋतु के आगमन का यह काल पर्यावरण और शरीर में बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ा देता है लेकिन जब होलिका जलाई जाती है तो उससे करीब 145 डिग्र...