नक्सली की पत्नी होना अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने महिला को किया बरी
रांची, जुलाई 8 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने 19 वर्ष पुराने नक्सलवाद से जुड़े एक मामले में गुमला की प्रमिला देवी को बड़ी राहत देते हुए उसकी आपराधिक अपील स्वीकार कर ली है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की कोर्ट ने गुमला की निचली अदालत के 7 अप्रैल 2007 को सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को रद्द करते हुए प्रमिला देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल घटनास्थल पर मौजूद होना, वह भी डेढ़ वर्ष की बच्ची को गोद में लेकर, अथवा किसी नक्सली की पत्नी होना किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में भी विफल रहा कि प्रमिला देवी किसी प्रतिबंधित नक्सली संगठन की सक्रिय सदस्य थीं। इन परिस्थितियों में उन्हें संदेह का लाभ नहीं, बल्कि साक्ष्यों के...
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