नई दिल्ली, मार्च 18 -- भारत की नई पीढ़ी, जिसे आमतौर पर 'जेन जी' कहा जाता है, अपनी आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों की ओर भी लौटती दिख रही है। पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न शहरों और कस्बों में होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में नौजवानों की बढ़ती भागीदारी इस बदलाव का स्पष्ट संकेत देती है। वे न सिर्फ विधि-विधान में हिस्सेदारी लेते हैं, बल्कि भंडारा कराने, कंजक पूजन जैसी व्यवस्थाओं में भी खुद को झोंक देते हैं। आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच नई पीढ़ी का अपनी परंपराओं के प्रति यूं आकर्षित होना एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रवृत्ति के रूप में सामने आ रहा है। धार्मिक त्योहारों के समय यह रुझान और भी स्पष्ट दिखाई देता है। आज से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहा है, तो इसमें आप युवाओं को व्रत करते ह...
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