नई दिल्ली, अप्रैल 10 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा है। हालांकि, इस बार वह सब नहीं होगा, जिसे वह दो दशक पहले छोड़कर गए थे। नई संसद और नए नेताओं के बीच समाजवादी आंदोलन का यह प्रमुख चेहरा नए सांसदों के लिए सीखने और समझने का मौका देगा तो सार्वजनिक जीवन में उनके द्वारा स्थापित मानदंडों की याद भी दिलाएगा। वह भी उस समय जबकि संसद अपनी परंपराओं और मर्यादाओं को लेकर अपने सदस्यों के आचरण और व्यवहार से सबसे ज्यादा जूझ रही है। नीतीश की इस नई पारी के राजनीतिक आयाम भी हैं। बिहार के राजनीतिक नेतृत्व में वह जेपी आंदोलन से निकले आखिरी चेहरे थे, अब वहां नई पीढ़ी नेतृत्व संभालेगी। साथ ही नई राजनीति का आगाज भी होगा, जिसमें भाजपा पहली बार सरकार का नेतृत्व करेगी। संघ, जनसंघ और भाजपा क...
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