नई दिल्ली, अगस्त 25 -- सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ जिला अदालत परिसर के पास सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए वकीलों के चैंबर गिराने से संबंधित आदेश को चुनौती वाली याचिका पर विचार करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी ही है। पीठ द्वारा याचिका पर विचार करने से अनिच्छा जताए जाने के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस ले लिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि मैंने इसे खुद देखा है। मैं दो साल तक वहां वरिष्ठ जज के रूप में रहा हूं। मुझे पता है कि वहां किस तरह के निर्माण हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का सुझाव दिया। पीठ ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने से इनकार करते हुए वकील को य...