लखनऊ, फरवरी 27 -- लखनऊ, कार्यालय संवाददाता भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय ध्रुपद कार्यशाला के तीसरे दिन विद्यार्थियों को ध्रुपद गायन की परम्परागत साधना के अंतर्गत आलाप विस्तार के विषय में विस्तार से जानकारी दी। प्रो. मधु भट्ट तैलंग ने आलाप के क्रम को स्पष्ट करते हुए तीव्र मध्य से आलाप-अभ्यास का प्रारम्भ कराया तथा ध्रुपद आलाप में प्रयुक्त होने वाले विविध तत्वों जैसे गमक, वेद, संचारी आदि की विस्तृत व्याख्या करते हुए उनका सप्रयोग अभ्यास भी कराया। प्रो. तैलंग ने विद्यार्थियों को बताया कि ध्रुपद साधना में स्वर की शुद्धता, लय की दृढ़ता तथा क्रमबद्ध आलाप-विस्तार का विशेष महत्व होता है। इस प्रशिक्षण सत्र में गायन विभाग के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इन सभी पहलुओं का गहन अभ्यास कराया गया, जो उनके लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। इ...