प्रयागराज, जुलाई 18 -- एनसीजेडसीसी में आयोजित साप्ताहिक विमर्श कार्यक्रम की शृंखला में शनिवार को नृत्यांगना बीना सिंह ने ढेड़िया लोकनृत्य के धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व पर विचार साझा किया। उन्होंने कहा कि ढेड़िया केवल एक लोकनृत्य नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन में नारी के धैर्य, आस्था और समर्पण का प्रतीक है। ढेड़िया का अर्थ धैर्य रखने वाली बहू माना जाता है। ढेड़िया नृत्य में महिलाएं अपने सिर पर एक पात्र में जलता हुआ दीपक रखकर संतुलन के साथ नृत्य करती हैं। यह केवल कलात्मक प्रदर्शन नहीं, बल्कि धैर्य, आत्मसंयम, श्रद्धा और साधना का प्रतीक माना जाता है। बीना सिंह ने कहा कि यह नृत्य नारी के धैर्य, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार तथा समाज के प्रति उसके समर्पण का प्रतीक है। त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए अयोध्या से प्रस्थान कर ...