गंगापार, अप्रैल 22 -- वैसाख माह के अंतिम दौर में ही जेठ जैसी तपती दोपहरी ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। आसमान से बरसती आग और लू के थपेड़ों के बीच आम लोग सुबह 9 बजे के बाद घरों में कैद होने को मजबूर हैं। पंखे, कूलर और एसी के सहारे लोग गर्मी से बचाव कर रहे हैं, लेकिन कस्बे के भारतगंज बस अड्डा चौराहे पर रोज़ एक अलग ही तस्वीर सामने आती है,जहाँ धूप की तपिश से कहीं ज्यादा 'पेट की भूख' हावी है। चौराहे पर दर्जनों दिहाड़ी मजदूर और राजगीर मिस्त्री काम की आस में घंटों खड़े रहते हैं। हालात ऐसे हैं कि निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली बालू, ईंट, पत्थर और सरिया तक आग की तरह तप रहे हैं। मजदूरों के औजार-कुदाल, रम्मा, छेनी और हथौड़े भी छूते ही हाथ जला देने वाली स्थिति में हैं। बावजूद इसके, इन मजदूरों के हौसले और मजबूरी दोनों उन्हें यहां खड़े रहने पर विवश ...
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