हमीरपुर, मार्च 19 -- हमीरपुर, संवाददाता। कभी घरों के आंगन से लेकर दरों-दीवार और बयालों में घोंसले बनाकर चहचहाने वाली गौरैया अब धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है। जनपद में कहीं भी गौरैया संरक्षण को लेकर कोई काम नहीं हो रहा है। करीब 10 साल पूर्व वन विभाग ने गौरैया संरक्षण को लेकर लकड़ी के छोटे-छोटे घोंसले बांटे थे, उसके बाद से विभाग को भी इस पक्षी की कोई सुध नहीं रही। बढ़ते शहरीकरण के साथ-साथ आधुनिकीकरण ने घरों को होटल में तब्दील करना शुरू कर दिया है। कभी पक्के घरों में भी बयाल होते थे, जहां गौरैया जैसा पक्षी अपना घोंसला बनाकर पीढ़ी दर पीढ़ी काटता था। लेकिन अब घरों को न सिर्फ पक्का बल्कि तमाम तरह के पीवीसी पैनल, फॉल सिलिंग और लकड़ी के बोर्डों से सजाया जा रहा है। बाहरी दीवारों में टायल्स भी लगाए जा रहे हैं। जिसके कारण घोंसलों की गुंजाइश खत्म हो गई है। ...
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