देहरादून, अप्रैल 3 -- देहरादून। जमीयत उलमा ए हिंद ने मांग की है कि केवल धार्मिक शिक्षा देने वाले मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से अनिवार्य संबद्धता (मान्यता) लेने से मुक्त रखा जाए। जमीयत ने कहा है कि जो शिक्षण संस्थाएं स्वेच्छा से सरकारी मान्यता या सहायता नहीं लेना चाहतीं, उन्हें इसके लिए बाध्य न किया जाए। इस संबंध में जल्द ही प्राधिकरण को एक औपचारिक पत्र भेजकर मदरसों का पक्ष रखा जाएगा। गुरुवार को आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा दार-ए-अरकम में जमीयत के जिलाध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान कासमी की अध्यक्षता और प्रवक्ता हाफिज शाहनजर के संचालन में उलेमाओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में मदरसों के सामने आ रही मौजूदा समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।वक्ताओं ने कहा कि 'उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025' के कई प्रावधानों को उच...