लखनऊ, मार्च 14 -- लखनऊ, संवाददाता। चिनहट के अनौरा कला स्थित वेदांत सत्संग आश्रम में चल रही भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। किसी को छोटा दिखाने के लिए किया गया कार्य धर्म नहीं, बल्कि धर्मभाष है। दक्ष धर्म रूपी यज्ञ करते हैं पर, वह धर्म भगवान शिव को छोटा दिखाने के लिए करते हैं लिहाजा वह धर्म नहीं धर्मभास है। धर्म तो वह है, जिससे हमें भागवत की प्राप्ति और समाज का कल्याण करने का मौका मिले। यहां स्वामी रामानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी अमृत चैतन्य महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के प्रदेश कोषाध्यक्ष स्वामी कृष्णानंद भारती, आलोक दीक्षित, संजय मिश्रा, बीके सिंह, पं. राम भवन शुक्ला आदि रहे।
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