मेरठ, मई 24 -- जैन तीर्थ क्षेत्र के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में सर्वप्रथम भगवान का अभिषेक के पश्चात शांतिधारा की गई। शांतिधारा अमित जैन आदि ने की। विधान के चतुर्थ दिन 160 परिवारों ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। विधान के मध्य आचार्य भाव भूषण महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा है कि हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता विलुप्त होती जा रही है। ऐसी संस्कृति और सभ्यता को अक्षुण्ण बनाने के लिए कुछ सुधार की आवश्यकता है। आज के समय स्त्रियों और लड़कियों का पहनावा व श्रृंगार मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इस कारण से युवा पीढ़ी धर्म से विमुख होती जा रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थानों पर अशोभनीय पहनावे पर पाबंदी होनी चाहिए। इसका समाज को प्रस्ताव पारित कर अनुपालन करना चाहिए तभी मंदिर में शांति और अतिशय दिख...