सराईकेला, दिसम्बर 10 -- राजनगर, संवाददाता। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत जनजातियों को एसटी का दर्जा मिला है। यह उनकी पारंपरिक और रूढ़िवादी जीवन-पद्धति के आधार पर है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर अपनी परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को छोड़ देता है तो उसे एसटी आरक्षण का लाभ मिलना उचित नहीं है। वह मंगलवार को राजनगर में आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और आरक्षण अधिकारों को लेकर मीडिया से बात कर रहे थे। सोरेन ने कहा कि आदिवासी जीवन का मूल सरना स्थल, पूजा-पद्धति, मानकी-मुंडा व्यवस्था, पहाड़ा राजा, सामूहिक उत्सव और प्रकृति आधारित संस्कृति है। जब कोई व्यक्ति इन सबको त्याग कर दूसरे धर्म में जाता है तो उसकी सामाजिक पहचान भी बदल जाती है। फिर भी यदि उसे आरक्षण मिलता रहे तो यह न समाज के साथ न्याय है और ...
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