धर्म को जानना ही नहीं, जीवन में उतारना भी आवश्यक
मेरठ, जून 12 -- शास्त्रीनगर डी ब्लॉक जैन मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्थान की ओर से शिक्षण और संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें धर्म, साधना, आत्मजागरण, जैन दर्शन के गहन सिद्धांतों पर चर्चा हुई। कहा कि धर्म से ही धर्मात्मा की रक्षा होती है, इसलिए धर्म को केवल जानना ही नहीं, बल्कि जीवन में उतारना भी आवश्यक है। शिविर में शास्त्री पीयूष ने जैन दर्शन के महत्वपूर्ण सिद्धांत गुणस्थान का सरल का विवेचन किया। बताया कि जीव अनादिकाल से जन्म मरण के चक्र में बंधा हुआ है। किंतु सम्यक मार्ग अपनाकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है। इसके लिए आत्मा को 14 गुणस्थानों की यात्रा करते हुए क्रोध, मान, माया एवं लोभ जैसे कषायों का क्रमशः त्याग करना आवश्यक है। यह भी पढ़ें- पांच दिवसीय जैन धार्मिक शिक्षण शिविर का शुभारंभ रत्नत्रय सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र...
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