कन्नौज, अप्रैल 7 -- सिकंदरपुर क्षेत्र के सीताराम आश्रम रौरी में चल रही धार्मिक कथा के पांचवें दिन जलेसर से पधारे कथावाचक पं.सुखलेंद्र द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को धर्म और कर्म का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जब-जब इस संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्मी तथा अहंकारी लोगों का प्रभाव बढ़ता है, तब भगवान को स्वयं पृथ्वी पर अवतार लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पाप बढऩे पर देवता भी विचलित हो जाते हैं, और ऋषि-मुनि तक सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगते हैं। ऐसे समय में पृथ्वी और देवताओं की पुकार सुनकर भगवान अवतरित होकर संतों और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। कथावाचक ने लोगों से आवाहन किया कि जीवन में सदैव अच्छे कर्म करें और किसी के प्रति दुर्भावना न रखें। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से किए गए सत्कर्म ही व्यक्ति को सम्मान और शांति प्रदान करते हैं तथा...