गोंडा, अप्रैल 3 -- रुपईडीह, संवाददाता। साधु-संतों, ब्राह्मण, गौ, भक्त-धर्म की रक्षा और पापों के नाश के लिए अवतरित होते हैं। समय अच्छा है तो सब अच्छे होते हैं, समय उल्टा हुआ तो अपने भी विरोधी हो जाते हैं। सत्य के लिए राजा दशरथ ने भगवान श्री राम को त्याग दिया और प्रेम के लिए अपना प्राण। ये बातें स्वामी प्रणव पुरी ने आर्यनगर में आयोजित चार दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन अपने प्रवचन करते हुए कहीं। श्रीराम कथा के स्वामी प्रणव पुरी कहा कि आर्य सुमंत केवल एक सारथी नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के परम सेवक, निष्ठावान भक्त एवं आदर्श कर्तव्यनिष्ठवान व्यक्ति थे। भगवान श्री राम के वनवास प्रसंग के दौरान उनकी पीड़ा, समर्पण और मर्यादा पालन की भावना को उन्होंने अत्यंत भावुक शैली में प्रस्तुत किया। जिसे सुनकर सभी श्रोता भाव विभोर हो गए। इस मौके पर पावर कारपो...